सिगरेट से जलाया, रेप किया और विरोध की कीमत चुकाने की धमकी दी; ईरान में प्रदर्शन दबाने के लिए सुरक्षाबलों ने लांघी सारी हदें!
Published on: 03 Feb 2026 | Author: Kuldeep Sharma
नई दिल्ली: ईरान में अयातुल्ला अली खामेनेई के नेतृत्व वाले इस्लामी शासन के खिलाफ हुए देशव्यापी प्रदर्शनों को भले ही दबा दिया गया हो, लेकिन अब उन घटनाओं से जुड़े ऐसे आरोप सामने आ रहे हैं, जो मानवता को झकझोर देने वाले हैं. ईरानी-जर्मन पत्रकार माइकल अब्दुल्लाही और अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों को कुचलने के लिए सुरक्षा बलों ने महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा और अमानवीय यातनाओं को हथियार की तरह इस्तेमाल किया है.
महिलाओं के खिलाफ हिंसा के गंभीर आरोप
पत्रकार माइकल अब्दुल्लाही के मुताबिक प्रदर्शन में शामिल कई महिलाओं को हिरासत में लेकर उनके साथ अत्याचार किया गया. प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों में बलात्कार, शारीरिक उत्पीड़न और डराने-धमकाने की घटनाओं का जिक्र है. आरोप है कि महिलाओं को जबरन निर्वस्त्र किया गया, उन्हें धमकियां दी गईं और विरोध की कीमत चुकाने को मजबूर किया गया.
प्रत्यक्षदर्शियों की गवाही से खुली पोल
जर्मन अखबार डाइ वेल्ट में प्रकाशित रिपोर्ट में कई चश्मदीदों ने बताया कि सुरक्षा बल घायल और डरी हुई महिलाओं को वाहनों में अमानवीय तरीके से ले जाते थे. कुछ गवाहों ने दावा किया कि हिरासत के दौरान महिलाओं को जान से मारने से पहले यौन हिंसा की धमकियां दी गईं. प्रदर्शन के दौरान लगातार इस तरह के अमानवीय कृत्य किए गए.
विरोध प्रदर्शन पर शासन की प्रतिक्रिया
दिसंबर 2025 से शुरू हुए ये प्रदर्शन पहले आर्थिक संकट के खिलाफ थे, लेकिन धीरे-धीरे इस्लामी शासन के विरोध में बदल गए. जवाब में सरकार ने इंटरनेट सेवाएं बंद कर दीं और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स व बसीज मिलिशिया को सड़कों पर उतार दिया. आरोप है कि हालात काबू में करने के लिए बाहरी लड़ाकों की भी तैनाती की गई थी.
मौतों के आंकड़े और मानवाधिकार चिंता
सरकारी आंकड़ों में जहां करीब 3,000 मौतों की बात कही गई है, वहीं अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों का दावा इससे कहीं ज्यादा का है. मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, हजारों मामलों की जांच अब भी अधूरी है. माइकल अब्दुल्लाही का कहना है कि भारी दमन के बावजूद ईरान के लोग डरने को तैयार नहीं हैं और बदलाव की उम्मीद अब भी जिंदा है.