रियल एस्टेट सेक्टर को बूस्ट करने के लिए केंद्र सरकार का मेगा प्लान, ऊंचाई संबंधी नियमों में मिल सकती है छूट
Published on: 13 Feb 2026 | Author: Anuj
नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आयोजित National Real Estate Development Council (NAREDCO) के राष्ट्रीय शहरी एवं रियल एस्टेट विकास सम्मेलन-2026 में केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा कि सरकार रियल एस्टेट और निर्माण क्षेत्र में बड़े सुधारों की तैयारी कर रही है.
उनका कहना था कि 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में इस क्षेत्र की भूमिका निर्णायक होगी और इसके लिए नीतिगत ढांचे में बदलाव जरूरी हैं.
'क्षैतिज विस्तार संभव नहीं'
केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि शहरों में जमीन की कमी के कारण अब क्षैतिज विस्तार संभव नहीं रह गया है. आने वाले वर्षों में बहुमंजिला इमारतों और ऊंची आवासीय परियोजनाओं पर जोर देना होगा. इसके लिए मौजूदा नियमों और निर्माण मानकों की समीक्षा की जा रही है. एक एजेंसी को नियामकीय ढांचे का अध्ययन सौंपा गया है, जिसकी सिफारिशें बाद में सार्वजनिक की जाएंगी.
'जीडीपी में योगदान दोगुना हो'
उन्होंने बताया कि भारतीय रियल एस्टेट बाजार 2030 तक एक ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है. पारदर्शिता, संरचनात्मक सुधार और निवेशकों के बढ़ते भरोसे से यह क्षेत्र तेजी पकड़ रहा है. 2047 तक इसका आकार 5 से 7 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने की संभावना जताई गई है. सरकार चाहती है कि इस क्षेत्र का जीडीपी में योगदान दोगुना हो.
हवाई अड्डों से मिलेगा प्रोत्साहन
केंद्रीय मंत्री के अनुसार, अगले पांच वर्षों में देश में लगभग 50 नए हवाई अड्डे जोड़े जाएंगे. अगले दो दशकों में यह संख्या 200 तक पहुंच सकती है. हवाई अड्डों के आसपास बुनियादी ढांचे के विकास से आवास, वाणिज्यिक परियोजनाओं और निर्माण गतिविधियों को सीधा लाभ मिलेगा. इसे आर्थिक गतिविधियों का गुणक प्रभाव बताया गया.
'नई पीढ़ी स्वामित्व से अधिक लचीलापन चाहती है'
केंद्रीय मंत्री ने NAREDCO से किराये के आवास मॉडल को बढ़ावा देने की अपील की. उनका कहना था कि नई पीढ़ी स्वामित्व से अधिक लचीलापन चाहती है. ऐसे में रेंटल हाउसिंग को संगठित ढांचे में विकसित करना समय की मांग है. इससे शहरी आबादी की जरूरतें बेहतर तरीके से पूरी की जा सकेंगी.
निरंजन हीरानंदानी ने क्या कहा?
वहीं, NAREDCO के चेयरमैन निरंजन हीरानंदानी ने कहा कि 2047 तक भारत की आधी से अधिक आबादी शहरों में होगी, इसलिए संतुलित शहरी विकास बेहद जरूरी है.