रूस से दोस्ती बनाम अमेरिकी ट्रेड डील! क्या भारत सच में बंद कर देगा रूसी तेल की खरीद?
Published on: 03 Feb 2026 | Author: Kuldeep Sharma
नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच बहु प्रतीक्षित ट्रेड डील फाइनल हो गई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि भारत अब रूस से तेल आयात बंद करेगा. इसके बदले अमेरिका ने भारत पर टैरिफ 50% से घटाकर 18% कर दिया है. वहीं भारत की तरफ से इस पर अब तो कोई बयान या प्रतिक्रिया नहीं दी गई है. हालांकि रूस के साथ भारत के पुराने रक्षा और रणनीतिक संबंध इस फैसले को प्रभावित नहीं करेंगे. तेल केवल अस्थायी मुद्दा है, जबकि दोनों देशों के बीच लंबे समय से कायम मित्रता और सहयोग मजबूत है.
रूस के साथ पुराने संबंध
रूस ने हमेशा भारत का संकट और अंतरराष्ट्रीय विवादों में साथ दिया है. 1971 के भारत-पाक युद्ध में रूस ने भारत का पक्ष लिया, था जबकि अमेरिका ने पाकिस्तान का समर्थन किया था. 1998 के परमाणु परीक्षण के बाद भी रूस ने हथियारों की सप्लाई जारी रखी. इसलिए रूस भारत के लिए केवल तेल का स्रोत नहीं, बल्कि सुरक्षा और रणनीति का भी अहम साझेदार है.
भारत की तेल जरूरत और अमेरिकी डील
गौरतलब है कि भारत अपनी कुल तेल जरूरत का 88% बाहर से ही आयात करता है, इसमें 2024-25 में 35% तेल रूस से खरीदा गया था. वहीं अमेरिका द्वारा लगाए गए 50% टैरिफ से निर्यात घट रहा था. डील के बाद टैरिफ घटकर 18% हो गया है. इस कदम से भारत को आर्थिक और व्यापारिक लाभ मिलेगा, जबकि तेल पर अस्थायी दबाव को संतुलित किया गया है.
क्या है संतुलन की रणनीति
गौरतलब है कि भारत हमेशा से गुट निरपेक्ष नीति अपनाता रहा है. अमेरिका और रूस के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है. तेल खरीद पर अस्थायी निर्णय का मतलब रूस के साथ रिश्तों को कमजोर करना नहीं है. रक्षा, अंतरिक्ष और रणनीति में दोनों देशों के सहयोग बरकरार रहेंगे.
क्या होगी आगे की राह
इस डील से भारत को आर्थिक लाभ मिलेगा और अमेरिका के साथ व्यापारिक संबंध मजबूत होंगे. वहीं रूस के साथ रणनीतिक और रक्षा सहयोग भी स्थिर रहेगा. हालांकि ट्रंप के तेल वाले बयान पर भारत ने अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. यह दर्शाता है कि भारत आर्थिक और सुरक्षा हितों में संतुलित और दूरदर्शी नीति अपनाता है.