तारिक रहमान की सत्ता में वापसी, क्या बदल देगी बांग्लादेश के तेवर; बीएनपी की जीत भारत के लिए क्यों है अहम?
Published on: 13 Feb 2026 | Author: Kuldeep Sharma
नई दिल्ली: बांग्लादेश के आम चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरने और तारिक रहमान के प्रधानमंत्री बनने की संभावना ने दक्षिण एशिया की राजनीति को नई दिशा दी है. आवामी लीग की गैरमौजूदगी में यह चुनाव एक नए राजनीतिक अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है. नई दिल्ली ने परिणाम स्पष्ट होते ही सकारात्मक संकेत दिए. मौजूदा क्षेत्रीय और वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए भारत इसे चुनौती से अधिक संतुलित अवसर के रूप में देख रहा है.
जमात-ए-इस्लामी को बहुमत न मिलना
भारत के लिए सबसे बड़ी राहत यह रही कि जमात-ए-इस्लामी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला. इस दल का झुकाव लंबे समय से कट्टरपंथी राजनीति और पाकिस्तान समर्थक रुख से जोड़ा जाता रहा है. यदि वह सत्ता में निर्णायक भूमिका में आता, तो भारत की पूर्वोत्तर सीमाओं पर सुरक्षा चुनौतियां बढ़ सकती थीं. बहुमत से दूर रहना संकेत देता है कि बांग्लादेश पूरी तरह वैचारिक ध्रुवीकरण की ओर नहीं गया है, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता को बल मिलेगा.
आर्थिक संकट और सहयोग की अनिवार्यता
बांग्लादेश इस समय आर्थिक दबाव झेल रहा है. विदेशी मुद्रा भंडार में कमी, निर्यात क्षेत्र पर असर और महंगाई जैसे मुद्दे नई सरकार की प्राथमिकता होंगे. भारत और बांग्लादेश के बीच ऊर्जा, रेल, सड़क और बंदरगाह परियोजनाओं में गहरा सहयोग रहा है. भारतीय निवेश भी उल्लेखनीय है. ऐसे में बीएनपी सरकार के लिए इन परियोजनाओं को जारी रखना व्यावहारिक आवश्यकता होगी, जिससे दोनों देशों को आर्थिक लाभ मिल सकता है.
भारत की पूर्व कूटनीतिक तैयारी
नई दिल्ली ने पिछले महीनों में संकेत दिए थे कि वह बदलती राजनीतिक परिस्थितियों के लिए तैयार है. बीएनपी नेतृत्व के साथ संवाद के रास्ते खुले रखे गए. राजनयिक स्तर पर संतुलित संपर्क बनाए गए ताकि सत्ता परिवर्तन की स्थिति में रिश्तों में अचानक तनाव न आए. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तारिक रहमान को बधाई देकर सहयोग का संदेश दिया. यह कूटनीतिक तैयारी भविष्य में स्थिर संबंधों की नींव बन सकती है.
क्षेत्रीय संपर्क और परस्पर निर्भरता
भारत और बांग्लादेश के संबंध केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि संरचनात्मक रूप से जुड़े हैं. पूर्वोत्तर भारत की कनेक्टिविटी में बांग्लादेश की अहम भूमिका है. रेल, जलमार्ग और सड़क परियोजनाएं दोनों देशों की स्थानीय अर्थव्यवस्था को जोड़ती हैं. बीएनपी के लिए इन परियोजनाओं को रोकना घरेलू विकास के लिहाज से नुकसानदेह होगा. इसलिए व्यावहारिक राजनीति संबंधों को स्थिर रखने की दिशा में प्रेरित कर सकती है.
बदलती वैश्विक राजनीति में संतुलन
इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और चीन की सक्रियता के बीच बांग्लादेश के लिए रणनीतिक संतुलन जरूरी है. किसी एक धुरी की ओर झुकाव जोखिमपूर्ण हो सकता है. भारत, जो क्षेत्रीय स्थिरता और आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, स्वाभाविक साझेदार बना रहेगा. ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री सहयोग और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में साझेदारी दोनों देशों के हित में है.