गाजा मीटिंग में शामिल होने के लिए US ने भारत को भेजा न्योता, विदेश मंत्रालय ने दी जानकारी
Published on: 13 Feb 2026 | Author: Shanu Sharma
डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा पट्टी में पीस बोर्ड स्थापित करने का फैसला लिया है, जिसमें शामिल होने के लिए भारत को भी न्योता दिया गया है. भारत विदेश मंत्रालय की ओर से गुरुवार को इस न्योता को लेकर जानकारी दी है. हालांकि इसमें अभी यह बात नहीं बताया गया है कि भारत 19 फरवरी को बोर्ड की प्रस्तावित मीटिंग में शामिल होगा या नहीं.
MEA के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया से बात करते हुए यह कन्फर्म किया कि नई दिल्ली को पीस बोर्ड में शामिल होने के बारे में वाशिंगटन से एक फॉर्मल न्योता मिला है, लेकिन इस पर अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है. उन्होंने कहा कि अभी हम इसपर विचार कर रहे हैं,
क्या है विदेश मंत्रालय का बयान?
विदेश मंत्रालय ने मीडिया से बात करते हुए इस क्षेत्र में शांति और स्टेबिलिटी स्थापित करने की बात को दोहराया है. हालांकि अमेरिका द्वारा की गई पहल पर अभी कोई कमिटमेंट नहीं दिया है. उन्होंने कहा कि जैसा कि आप जानते हैं, भारत ने वेस्ट एशिया में शांति, स्टेबिलिटी और बातचीत को बढ़ावा देने वाली कोशिशों का लगातार समर्थन किया है.
हमारे प्रधानमंत्री ने भी ऐसे सभी इनिशिएटिव का स्वागत किया है जो गाजा समेत पूरे इलाके में शांति स्थापित करने का काम करे. बोर्ड ऑफ़ पीस को यूनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल रेज़ोल्यूशन 2803 के तहत बनाया गया था, जिसने गाजा में गवर्नेंस, रिकंस्ट्रक्शन और स्टेबिलिटी को सपोर्ट करने के लिए एक ट्रांज़िशनल अथॉरिटी के तौर पर इसकी स्थापना का स्वागत किया था.
ट्रंप के बोर्ड ऑफ पीस में कौन है?
इस बोर्ड के स्ट्रक्चर में यूनाइटेड स्टेट्स को इसका चेयरमैन बनाया गया है. इसमें एक सीनियर नेताओं का फाउंडिंग एग्जीक्यूटिव बोर्ड भी बनाया गया है. जिसमें मार्को रुबियो, ट्रंप के स्पेशल एन्वॉय स्टीव विटकॉफ, पूर्व ब्रिटिश प्राइम मिनिस्टर टोनी ब्लेयर, वर्ल्ड बैंक प्रेसिडेंट अजय बंगा, जेरेड कुशनर और मार्क रोवन वगैरह शामिल हैं.
ट्रंप द्वारा न्योता भेजे जाने पर कई देशों ने इसे स्वीकार भी कर लिया है. जिनमें सऊदी अरब, मिस्त्र, कतर, तुर्की समेत कई देश शामिल है. ट्रंप के इस पहल को गाजा में शांति स्थापित औ फिर इसके निर्माण में मदद करने के तौर पर देखा जा रहा है. रिपोर्ट की मानें तो 60 देशों को भेजे गए न्योता में 27 देशों ने स्वीकार कर लिया है. हालांकि फांस,जर्मनी और यूके जैसे देशों ने इसमें शामिल होने से मना कर दिया है.