बिहार में फिर बिकेगी शराब! NDA के सहयोगी ही करने लगे डिमांड, क्या नीतीश कुमार मानेंगे साथियों की बात?
Published on: 19 Feb 2026 | Author: Kuldeep Sharma
पटना: बिहार में नीतीश कुमार के लिए नई चुनौती खड़ी हो गई है. उनके अपने गठबंधन सहयोगी अब शराबबंदी कानून की कड़ी आलोचना कर रहे हैं और इसकी समीक्षा की मांग कर रहे हैं. जीतन राम मांझी ने बुधवार को गया में खुले तौर पर कहा कि यह नीति राज्य को आर्थिक नुकसान पहुंचा रही है और गरीबों को सबसे ज्यादा प्रभावित कर रही है. उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी ने भी सदन में यही बात दोहराई है. नीतीश की यह पुरानी महत्वाकांक्षी योजना अब गठबंधन के अंदर ही बहस का विषय बन गई है.
मांझी का तीखा हमला
जीतन राम मांझी ने कहा कि शराबबंदी नाम की चीज सिर्फ कागजों पर है. असल में होम डिलीवरी चल रही है. उन्होंने बताया कि अदालतों में 8 लाख से ज्यादा मामले लंबित हैं, जिनमें 3.5 से 4 लाख मामले वंचित वर्गों के खिलाफ हैं. मांझी का दावा है कि गरीब लोग जहरीली शराब पीकर मर रहे हैं, जबकि बड़े तस्कर पैसे देकर बच निकलते हैं.
गरीबों पर सबसे ज्यादा असर
मांझी ने आरोप लगाया कि शराबबंदी के नाम पर गरीबों को जेल भेजा जा रहा है. जहरीली शराब सस्ती मिल रही है, जिससे उनकी उम्र कम हो रही है और बीमारियां बढ़ रही हैं. उन्होंने कहा कि नीति गलत नहीं है, लेकिन लागू करने में बड़ी खामियां हैं. इसलिए बार-बार नीतीश कुमार से समीक्षा की अपील की जा रही है.
आरएलएम ने भी उठाया मुद्दा
उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा के विधायक माधव आनंद ने विधानसभा में नीतीश की मौजूदगी में ही शराबबंदी की समीक्षा की मांग की. उन्होंने कहा कि कानून तो बना, लेकिन शराब अब घर-घर पहुंच रही है. राज्य को राजस्व का बड़ा नुकसान हो रहा है. सरकार ने इस मांग को तुरंत खारिज कर दिया.
जेडीयू का पलटवार
जेडीयू ने सहयोगियों की मांग को हास्यास्पद बताया. प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि सभी दलों ने मिलकर इस कानून को पास किया था और सदन में शपथ भी ली थी. अब समीक्षा की बात क्यों? पार्टी का दावा है कि शराबबंदी से महिलाओं का जीवन बेहतर हुआ है और जनता का भरोसा बढ़ा है. अब सबकी नजरें नीतीश कुमार पर हैं कि वे क्या फैसला लेते हैं.