कटऑफ 18 फिर भी 31 अंक वाले बाहर, असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती में बवाल
Published on: 13 Feb 2026 | Author: Babli Rautela
झारखंड लोक सेवा आयोग द्वारा सहायक प्राध्यापक एनेस्थिसियोलॉजी पद की नियुक्ति प्रक्रिया एक बार फिर विवादों में आ गई है. विज्ञापन संख्या 08 23 के तहत जारी मेधा सूची पर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. अभ्यर्थियों का आरोप है कि कटऑफ 18 अंक तय होने के बावजूद 30 से 31 अंक पाने वाले योग्य उम्मीदवारों को चयन सूची से बाहर कर दिया गया. इससे भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं.
नियुक्ति आठ पदों पर होनी थी. राज्य सरकार की नियमावली 2021 के अनुसार सबसे पहले झारखंड स्वास्थ्य सेवा में कार्यरत चिकित्सा पदाधिकारियों यानी इन सर्विस डॉक्टरों से रिक्तियां भरी जानी थीं. लेकिन जारी मेधा सूची में कई बाहरी चिकित्सकों के नाम शामिल किए गए हैं, जिनमें कुछ बिहार में कार्यरत बताए जा रहे हैं. आरोप है कि इन सर्विस अभ्यर्थियों को न केवल नजरअंदाज किया गया, बल्कि उनकी उम्मीदवारी अस्वीकृत करने का कोई स्पष्ट कारण भी नहीं बताया गया.
कटऑफ 18 फिर भी बाहर 31 अंक वाले
अभ्यर्थियों का दावा है कि मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया और राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग के सभी मानकों को उन्होंने पूरा किया. कई इन सर्विस उम्मीदवारों के अनुसार साक्षात्कार अंकों को छोड़कर भी उनके कुल अंक 30 से 31 तक बनते हैं. जबकि आयोग द्वारा तय कटऑफ मात्र 18 अंक था. ऐसे में अधिक अंक प्राप्त करने के बावजूद चयन सूची से बाहर होना उन्हें हैरान कर रहा है.
कुछ अभ्यर्थियों ने आवेदन के साथ अनुभव प्रमाण पत्र और स्वास्थ्य विभाग झारखंड द्वारा जारी अनापत्ति प्रमाण पत्र भी जमा किया था. साथ ही एनेस्थिसियोलॉजी विषय से संबंधित अंतरराष्ट्रीय और इंडेक्स्ड जर्नल में प्रकाशित शोध पत्रों के प्रमाण भी दिए गए थे.
इंटरव्यू और इन सर्विस अंकों पर भी सवाल
चयन प्रक्रिया में एमबीबीएस और पीजी डिग्री के अंक तय थे. इसके अलावा इंटरव्यू के लिए छह अंक और पांच साल की इन सर्विस सेवा के लिए दस अंक निर्धारित थे. अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि बाहरी उम्मीदवार को इंटरव्यू में पूरे छह अंक भी दे दिए जाएं, तब भी वह इन सर्विस अभ्यर्थी को मिलने वाले दस अतिरिक्त अंकों से कम ही होगा. फिर भी इन सर्विस उम्मीदवारों का चयन न होना आयोग की कार्यशैली पर सवाल खड़ा कर रहा है.
मेधा सूची जारी होने के बाद कई अभ्यर्थियों ने आयोग से पुनर्विचार का अनुरोध किया है. हालांकि अब तक इस पर कोई ठोस कदम सामने नहीं आया है. आयोग ने परिणाम जारी करते समय यह जरूर कहा है कि यदि किसी प्रकार की त्रुटि सामने आती है तो सुधार का अधिकार उसके पास सुरक्षित रहेगा. लेकिन अभ्यर्थियों का कहना है कि उनके अनुरोध पर अब तक कोई साफ रिएक्शन नहीं दिया गया है.
सचिव ने क्या कहा
जेपीएससी के सचिव संदीप कुमार ने कहा कि मामले की पूरी जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है. उन्होंने यह माना कि नियमों के अनुसार सबसे पहले झारखंड स्वास्थ्य सेवा में कार्यरत चिकित्सकों को प्राथमिकता दी जानी थी. अब इस विवाद ने राज्य की भर्ती प्रणाली और पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. अगर जल्द स्पष्ट जवाब नहीं मिलता, तो मामला और गहराने की संभावना है.