बेड के बॉक्स में बंद मिली 12 साल की नाबालिग, 6 साल से बना रखा था घरेलू नौकर, वीडियो में देखें हैवानियत की हद
Published on: 04 Feb 2026 | Author: Kuldeep Sharma
असम की राजधानी गुवाहाटी से बाल श्रम और अमानवीय व्यवहार का चौंकाने वाला मामला सामने आया है. यहां एक 12 साल की बच्ची को घरेलू नौकर बनाकर पिछले छह वर्षों से काम कराया जा रहा था. सूचना मिलने पर जिला श्रम टास्क फोर्स और पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई कर बच्ची को रेस्क्यू किया. छापेमारी के दौरान बच्ची की हालत बेहद खराब मिली, जिससे लंबे समय तक शोषण की आशंका जताई जा रही है.
पंजाबाड़ी में देर रात छापेमारी
यह कार्रवाई रविवार रात गुवाहाटी के पंजाबाड़ी इलाके में की गई. जिला श्रम टास्क फोर्स, असम सेंटर फॉर रूरल डेवलपमेंट और दिसपुर थाने की पुलिस टीम को एक घर में नाबालिग से अवैध रूप से काम कराने की सूचना मिली थी. सूचना के आधार पर टीम ने तुरंत छापा मारा और पूरे घर की तलाशी शुरू की.
बेड के नीचे बॉक्स में छिपाई गई बच्ची
छापेमारी के दौरान घर के मालिकों ने किसी भी बच्ची की मौजूदगी से इनकार किया और अधिकारियों से सहयोग करने से बचते रहे. शक गहराने पर जब घर की गहन तलाशी ली गई, तो बच्ची को बेड के नीचे रखे एक बॉक्स में छिपा हुआ पाया गया. यह सब देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए.
छह साल से घरेलू नौकर के रूप में काम
जांच में सामने आया कि बच्ची असम के सिलचर इलाके की रहने वाली है और पिछले छह वर्षों से उसी घर में घरेलू काम कर रही थी. इस दौरान वह बेहद कम उम्र में लगातार शारीरिक और मानसिक दबाव में रखी गई. अधिकारियों के अनुसार बच्ची की हालत कमजोर थी और उसके शरीर पर चोटों के निशान भी मिले.
यहां देखें वीडियो
Guwahati horror 13yo girl trafficked into domestic slavery at 7, beaten for 6 yrs, then hidden in a bed box to dodge raid.
— aree_shuklajii (@th_anonymouse) February 3, 2026
What’s 7yr child is capable of doing for herself ?
This is gendered violence normalized in our homes. Women & girls as invisible, disposable labour.… pic.twitter.com/q6L1khuh9z
मामला दर्ज, बच्ची सुरक्षित बरामद
पुलिस ने घर के मालिक अमरीन अख्तर लश्कर और बहारुल हक लश्कर के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है. रेस्क्यू के बाद बच्ची को सुरक्षित हिरासत में ले जाया गया, जहां उसका मेडिकल परीक्षण कराया गया. इसके साथ ही उसे काउंसलिंग और पुनर्वास सहायता भी दी जा रही है, ताकि वह सामान्य जीवन की ओर लौट सके.