जापान की 'आयरन लेडी' सनाए ताकाइची के PM बनने से भारत को कितना होगा फायदा? चीन की बढ़ी टेंशन
Published on: 09 Feb 2026 | Author: Km Jaya
नई दिल्ली: जापान की सत्ताधारी लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी यानी LDP ने रविवार के आम चुनाव में हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में दो-तिहाई बहुमत हासिल किया, जिससे प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची को अपने रूढ़िवादी नीति एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए एक निर्णायक जनादेश मिला.
465 सदस्यों वाले निचले सदन में 310 सीटों की दो-तिहाई सीमा पार करने से LDP को संवैधानिक संशोधन करने और कानून पारित करने की अनुमति मिलती है, भले ही इसे ऊपरी सदन हाउस ऑफ काउंसलर्स द्वारा अस्वीकार कर दिया जाए, जहां सत्ताधारी गठबंधन अभी भी अल्पसंख्यक में है. जापान में ऐसा बहुमत हासिल करने वाली युद्ध के बाद की पहली पार्टी है.
पीएम मोदी ने क्या कहा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापान के निचले सदन, हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के लिए हुए चुनावों में उनके सत्ताधारी गठबंधन की अनुमानित ऐतिहासिक जीत पर जापानी PM ताकाइची को बधाई दी, और इस बात पर जोर दिया कि भारत-जापान संबंध अपनी मजबूत विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी के माध्यम से वैश्विक शांति, स्थिरता और साझा समृद्धि को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण हैं.
X पर एक पोस्ट में प्रधानमंत्री मोदी ने क्या लिखा?
Congratulations Sanae Takaichi on your landmark victory in the elections to the House of Representatives!
— Narendra Modi (@narendramodi) February 8, 2026
Our Special Strategic and Global Partnership plays a vital role in enhancing…
कैसा है भारत जापान की संबंध?
भारत और जापान के संबंध बीते वर्षों में लगातार गहरे हुए हैं. दोनों देश स्वतंत्र, खुले और स्थिर इंडो पैसिफिक क्षेत्र के समर्थक हैं. क्वाड मंच के जरिए भारत, जापान, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया मिलकर क्षेत्रीय सुरक्षा और सहयोग को आगे बढ़ा रहे हैं. सनाए ताकाइची ने पहले भी भारत को लोकतांत्रिक, तकनीकी और विनिर्माण क्षेत्र का भरोसेमंद साझेदार बताया है.
अक्टूबर 2025 में जापानी संसद को संबोधित करते हुए ताकाइची ने भारत को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए अहम भागीदार कहा था. उन्होंने स्पष्ट किया था कि फ्री एंड ओपन इंडो पैसिफिक नीति को आगे बढ़ाने में भारत की भूमिका केंद्रीय है. प्रधानमंत्री बनने के बाद पीएम मोदी से बातचीत में भी उन्होंने भारत जापान संबंधों को नए स्वर्णिम अध्याय तक ले जाने की बात कही थी.
सनाए ताकाइची का चीन से कैसा है संबंध?
सनाए ताकाइची को चीन के प्रति सख्त रुख अपनाने वाली नेता माना जाता है. उन्होंने चीन की आर्थिक नीतियों, बौद्धिक संपदा उल्लंघन और बढ़ते सैन्य प्रभाव की आलोचना की है. ताइवान को लेकर भी उनका रुख कड़ा रहा है. इससे साफ है कि जापान अब क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर अधिक सक्रिय भूमिका निभाएगा.
इस जीत के बाद भारत और जापान के बीच रक्षा, तकनीक, साइबर सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला जैसे क्षेत्रों में सहयोग और बढ़ने की उम्मीद है. चीन पर निर्भरता कम करने की जापान की नीति भारत के हितों से मेल खाती है. आने वाले समय में दोनों देशों के रिश्ते रणनीतिक और आर्थिक दोनों स्तरों पर और मजबूत होते दिख रहे हैं.