पाकिस्तान की जेल में कैद इमरान खान पर ढहाया जा रहा जुल्म! 85 फीसदी तक गई आंख की रोशनी
Published on: 12 Feb 2026 | Author: Sagar Bhardwaj
अपनी कप्तानी में पाकिस्तान को एकमात्र विश्व कप जिताने वाले पूर्व क्रिकेटर और पीटीआई के संस्थापक इमरान पर अपने ही देश में जमकर जुल्म ढहाया जा रहा है. लंबे समय पाकिस्तान की अदियाला जेल में बंद इमरान खान की दाहिनी आंख की रोशनी 85 फीसदी तक चली गई है. पाकिस्तान की मीडिया रिपोर्ट्स में यह बात सामने आई है.
अब जाकर पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को इमरान खान की आंख की जांच के लिए स्पेशल मेडिकल टीम बनाने का आदेश दिया है. कोर्ट में पेश की गई एक रिपोर्ट के बाद यह आदेश जारी किया गया है जिसमें इमरान खान ने दावा किया था कि उनकी दाहिनी आंख में सिर्फ 15 फीसदी रोशनी बची है.
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि इमरान खान को उनके बच्चों से मिलने की इजाजत दी जाए. कोर्ट ने कहा कि 16 फरवरी से पहले इमरान खान की आंखों की जांच हर हाल में कराई जाए.
खून का थक्का जमने से गई रोशनी
कोर्ट में पेश रिपोर्ट में इमरान खान ने कहा कि उनकी दाईं आंख की केवल लगभग 15 प्रतिशत रोशनी बची है. रिपोर्ट के अनुसार, अक्तूबर 2025 तक उनकी दोनों आंखों की रोशनी सामान्य थी लेकिन बाद में धुंधलापन शुरू हुआ और इलाज में देरी के कारण उनकी स्थिति बिगड़ गई. इसके बाद डॉक्टरों ने जांच में उनकी आंख में खून का थक्का होने की समस्या की पहचान की और उनका इलाज भी किया लेकिन रोशनी पूरी तरह वापस नहीं आ सकी.
कैदी की सेहत राज्य की जिम्मेदारी
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा कि कैदी की सेहत सर्वोच्च प्राथमिकता है और राज्य का दायित्व है कि उसे उचित इलाज मिले. कोर्ट ने यह भी कहा कि सभी कैदियों के साथ समान व्यवहार किया जाना चाहिए. कोर्ट ने कहा कि मानवता के तौर पर कैदी का उसके परिवार से मिलना भी जरूरी है, इसलिए उन्हें उनके बच्चों से टेलीफोन पर बातचीत की अनुमति दी जाए.
सरकार का स्टैंड जानना चाहते हैं
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम इमरान खान के स्वास्थ्य के मामले में सरकार का स्टैंड जानना चाहते हैं. इस पर पाकिस्तान के अटॉर्नी जनरल मंसूर उस्मान अवान ने कन्फर्म किया कि मेडिकल सुविधा देना सरकार की जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा कि अगर कैदी संतुष्ट नहीं है तो सरकार कदम उठाएगी.
जेल में इलाज पर उठे सवाल
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि इमरान खान ने पहले जेल प्रशासन को आंख की समस्या के बारे में शिकायत की थी लेकिन उन्हें समय पर विशेष इलाज नहीं मिला. बाद में विशेष डॉक्टर बुलाए गए. यह मामला सिर्फ एक कैदी के स्वास्थ्य का नहीं बल्कि जेलों में मेडिकल सुविधाओं, मानवाधिकार और राजनीतिक संवेदनशीलता से भी जुड़ा माना जा रहा है.