'हमें टॉयलेट पेपर की तरह इस्तेमाल किया', पाक के मंत्री ने अमेरिका को लेकर क्यों कहा ऐसा?
Published on: 10 Feb 2026 | Author: Kanhaiya Kumar Jha
नई दिल्ली: पाकिस्तान और अमेरिका के रिश्तों को लेकर एक बार फिर तल्खी सामने आई है. हाल के दिनों में दोनों देशों की नजदीकी की चर्चा थी, लेकिन पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के बयान ने तस्वीर बदल दी. नेशनल असेंबली में दिए गए भाषण में उन्होंने अमेरिका पर पाकिस्तान को केवल अपने हितों के लिए इस्तेमाल करने का आरोप लगाया. उनके शब्दों में यह सिर्फ कूटनीतिक नाराजगी नहीं, बल्कि दशकों की नीतियों पर तीखा हमला था.
पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में बोलते हुए रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने बेहद सख्त भाषा का इस्तेमाल किया. उन्होंने कहा कि अमेरिका ने पाकिस्तान को टॉयलेट पेपर की तरह इस्तेमाल किया. जब तक जरूरत थी, तब तक सहयोग लिया गया और काम निकलते ही पाकिस्तान को फेंक दिया गया. उनका यह बयान साफ संकेत देता है कि इस्लामाबाद में अमेरिका को लेकर असंतोष अब खुलकर सामने आ रहा है.
जियाउल हक और मुशर्रफ पर सवाल
ख्वाजा आसिफ ने इस मौके पर पाकिस्तान के दो पूर्व सैन्य शासकों जनरल जियाउल हक और परवेज मुशर्रफ को भी कठघरे में खड़ा किया. उन्होंने कहा कि 1980 के दशक में अफगानिस्तान में रूस के खिलाफ संघर्ष अमेरिका के इशारे पर शुरू हुआ. उस समय पाकिस्तान ने अपने हित साधने के लिए इसमें अपने लोगों को झोंक दिया, जो एक ऐतिहासिक भूल साबित हुई.
जिहाद के नाम पर सियासत
रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि उस दौर में अफगानिस्तान की लड़ाई को जिहाद का नाम दिया गया, जबकि हकीकत कुछ और थी. उनके अनुसार रूस ने अफगानिस्तान पर कब्जा नहीं किया था, बल्कि तत्कालीन अफगान सरकार ने उसे बुलाया था. पाकिस्तान को इस संघर्ष का हिस्सा नहीं बनना चाहिए था, लेकिन सत्ता में बैठे लोगों ने इसे मजहबी रंग देकर जनता को गुमराह किया.
सुपरपॉवर की मान्यता की चाह
ख्वाजा आसिफ ने कहा कि अफगानिस्तान की जमीन पर लड़ी गई दोनों जंगें न तो इस्लाम के लिए थीं और न ही किसी धार्मिक उद्देश्य से. उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन तानाशाहों को अंतरराष्ट्रीय मान्यता और एक सुपरपॉवर की तारीफ चाहिए थी. इसके लिए पाकिस्तान ने अपना शैक्षणिक पाठ्यक्रम तक बदल दिया और इतिहास को नए सिरे से लिखा, जिसकी कीमत देश आज तक चुका रहा है.
2001 की गलती और उसका नुकसान
अपने बयान में ख्वाजा आसिफ ने साल 2001 का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि 9.11 के बाद अमेरिका का साथ देकर तालिबान के खिलाफ जाना एक और बड़ी भूल थी. अमेरिका वहां से चला गया, लेकिन नुकसान पाकिस्तान को उठाना पड़ा. हमने अमेरिका को एयरस्पेस, कराची पोर्ट और अपने लोग तक दिए. बदले में सिर्फ तबाही, अस्थिरता और अंतहीन नुकसान मिला, जिसकी भरपाई संभव नहीं है.