सोने की चमक फीकी! लाख रुपये से भी कम हो सकता है दाम, पैसे लगाने से पहले जान लें पूरी जानकारी
Published on: 16 Feb 2026 | Author: Meenu Singh
नई दिल्ली: सोने की शानदार तेजी आखिरकार रुकती नजर आ रही है. इस साल की शुरुआत में रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद, कीमतें अब तेजी से गिर रही हैं, जिससे निवेशक यह सोचने पर मजबूर हो गए हैं कि क्या तेजी का दौर खत्म हो गया है. सोना, जिसे हमेशा संकट के दौर का सबसे भरोसेमंद सहारा माना जाता है, अब खुद दबाव में दिखाई दे रहा है. सवाल उठने लगा है कि क्या सोने की तेज़ रफ्तार अब थमने वाली है?
जनवरी 2026 में नई ऊंचाइयों पर पहुंचने के बाद अब घरेलू और वैश्विक बाजारों में नरमी साफ दिख रही है. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोना 10 ग्राम के लिए 1,80,779 रुपये के सर्वकालिक शिखर पर पहुंचा था, लेकिन अब यह फिसलकर करीब 1,56,200 रुपये तक आ गया है. इसी तरह अंतरराष्ट्रीय कॉमेक्स बाजार में भी कीमतें अपने उच्चतम स्तर से लगभग 10 फीसदी नीचे आ चुकी हैं. जोकि निवेशकों के लिए चिंता का विषय है.
रूस की संभावित डॉलर वापसी
बाजार में गिरावट की एक बड़ी वजह वैश्विक राजनीतिक बदलावों की अटकलें हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार, रूस अमेरिका के साथ संभावित आर्थिक सहयोग के तहत डॉलर आधारित व्यापार समझौतों पर विचार कर सकता है. अगर ऐसा होता है, तो ब्रिक्स देशों के उस प्रयास को झटका लग सकता है, जिसमें वे डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए बड़े पैमाने पर सोना खरीद रहे थे.
केंद्रीय बैंकों की भूमिका
पिछले दो वर्षों में सोने की तेजी के पीछे केंद्रीय बैंकों की भारी खरीद प्रमुख कारण रही है. ब्रिक्स देशों ने वैश्विक खरीद में बड़ा योगदान दिया. बाजार विशेषज्ञ के अनुसार, डोनाल्ड ट्रम्प के सत्ता में लौटने और टैरिफ संबंधी चिंताओं के फिर से उभरने के बाद, विशेष रूप से ब्रिक्स देशों के केंद्रीय बैंकों ने सोने की खरीद बढ़ा दी.2020 से 2024 के बीच, ब्रिक्स देशों के केंद्रीय बैंकों ने वैश्विक सोना खरीद में आधे से ज्यादा का योगदान दिया.
चीन और रूस ने उत्पादन बढ़ाया और भंडार मजबूत किए, जबकि ब्राजील ने भी वर्षों बाद सोना जोड़ा. मांग और सीमित आपूर्ति के कारण कीमतें रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई थीं.
अमेरिकी नीति और ब्याज दरें
अमेरिका में बढ़ती मूल्य वृद्धि ने फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों को कमजोर किया है. ऐसे माहौल में निवेशक सोने की बजाय लंबे समय के सरकारी बॉन्ड की ओर रुख कर सकते हैं, जैसा 2008 के वित्तीय संकट के समय देखा गया था.
भारत में 1 लाख प्रति 10 ग्राम हो सकता है सोना
विशेषज्ञों का मानना है कि कीमतों में अस्थायी उछाल संभव है, लेकिन दीर्घकाल में गिरावट जारी रह सकती है. अनुमान है कि अगले कुछ वर्षों में भारत में सोना 90,000 से 1 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के दायरे में आ सकता है. फिलहाल बाजार की नजर रूस की रणनीति और केंद्रीय बैंकों की अगली चाल पर टिकी है.