मध्य प्रदेश में नसबंदी के नाम पर टॉर्चर, तपती धूप में लिटाई गईं 175 महिलाएं; दो मिनट में कर डाला एक ऑपरेशन
Published on: 16 Feb 2026 | Author: Kanhaiya Kumar Jha
भोपाल: मध्य प्रदेश के धार जिले के बाग सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में शुक्रवार को आयोजित परिवार नियोजन शिविर ने सरकारी दावों की पोल खोलकर रख दी है. इस शिविर में नसबंदी के लिए बुलाई गई महिलाओं के साथ जो व्यवहार हुआ, उसने न केवल मानवाधिकारों को ठेंगा दिखाया बल्कि स्वास्थ्य विभाग की संवेदनहीनता को भी उजागर किया. शिविर में करीब 180 महिलाएं अपने छोटे बच्चों और परिजनों के साथ सुबह ही पहुंच गई थीं, लेकिन वहां उनके बैठने तक की व्यवस्था नहीं थी.
वहां मौजूद स्थानीय लोगों और परिजनों के अनुसार, नसबंदी प्रक्रिया के बाद महिलाओं को न तो बिस्तर मिले और न ही सिर छुपाने के लिए पर्याप्त छाया. भीषण गर्मी और उमस के बीच महिलाओं को ऑपरेशन के तुरंत बाद अस्पताल के ठंडे और गंदे फर्श पर लेटने को मजबूर होना पड़ा. आलम यह था कि केंद्र में पीने के पानी तक की व्यवस्था नहीं थी, जिसके चलते छोटे बच्चों के साथ आई महिलाओं को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा.
दो मिनट में एक सर्जरी: गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे चौंकाने वाला खुलासा बाग सरकारी अस्पताल के सुपरवाइजर बसंत अजनारे के बयान से हुआ. अजनारे के अनुसार, शिविर के लिए नियुक्त किए गए एक निजी डॉक्टर हर दो मिनट में एक नसबंदी ऑपरेशन कर रहे थे. इतनी तेजी से किए जा रहे ऑपरेशनों ने सर्जिकल गुणवत्ता और महिलाओं की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. जब इस अव्यवस्था और महिलाओं की तकलीफों को लेकर सुपरवाइजर से सवाल किए गए, तो उन्होंने सीधे जवाब देने के बजाय मामले से पल्ला झाड़ने की कोशिश की.
इस कैंप में महिलाओं को लाने वाली आंगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं ने भी स्वीकार किया कि केंद्र में बुनियादी सुविधाओं का भारी अभाव था. उन्होंने भी मांग की कि भविष्य में ऐसी स्थितियों से बचने के लिए डॉक्टरों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए.
दबाव में विभाग: नोटिस की औपचारिकता या होगी कार्रवाई?
घटना के बाद फैले आक्रोश और विवाद को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग हरकत में तो आया है, लेकिन उसकी कार्रवाई अभी महज कागजों तक सीमित दिख रही है. बाग ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (BMO) वीरभद्र सिंह ने स्वीकार किया कि सर्जन की अनुपलब्धता के कारण एक निजी डॉक्टर की सेवाएं ली गई थीं. हालांकि, लापरवाही के सवालों पर वे गोलमोल जवाब देते नजर आए.
फिलहाल, स्वास्थ्य विभाग ने बाग बीएमओ को 'कारण बताओ' नोटिस जारी कर दिया है. लेकिन बड़ा सवाल यह बना हुआ है कि क्या 175 से अधिक महिलाओं की जान और गरिमा के साथ हुए इस बड़े खिलवाड़ के लिए केवल एक नोटिस काफी है? क्षेत्र के लोगों में भारी गुस्सा है और वे जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.