ऑनलाइन मोबाइल गेमिंग की लत है मौत का द्वार..., हॉलीवुड की ये 5 फिल्में पहले ही डिकोड कर चुकीं हैं खौफनाक सच्चाई
Published on: 04 Feb 2026 | Author: Babli Rautela
मुंबई: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से सामने आई तीन सगी बहनों की मौत की खबर ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है. 12, 14 और 16 साल की तीनों बहनों ने एक साथ नौवीं मंजिल से कूदकर अपनी जान दे दी है. पुलिस जांच में सामने आया कि तीनों एक टास्क बेस्ड कोरियन लवर गेम की लत का शिकार थीं. गेम में दिए गए टास्क पूरे न कर पाने का मानसिक दबाव इतना बढ़ गया कि बच्चों ने यह खौफनाक कदम उठा लिया है.
घटना स्थल से मिले आखिरी शब्द 'सॉरी पापा' यह बताते हैं कि बच्चों का मन किस कदर टूट चुका था. यह कोई पहला मामला नहीं है जब मोबाइल या ऑनलाइन गेम्स की वजह से जान गई हो. इससे पहले भी ब्लू व्हेल जैसे गेम्स कई मासूम जिंदगियां निगल चुके हैं.
गेमिंग एडिक्शन कैसे बन रहा है खतरा
आज के दौर में मोबाइल गेम्स सिर्फ टाइम पास नहीं रहे. टास्क रिवॉर्ड और पनिशमेंट का सिस्टम बच्चों और युवाओं के दिमाग पर गहरा असर डालता है. धीरे धीरे यह मनोरंजन लत में बदल जाता है. हारने या टास्क पूरा न करने पर मिलने वाला डर और मानसिक दबाव कई बार जानलेवा साबित हो जाता है. हॉलीवुड सिनेमा ने इस खतरे को सालों पहले पहचान लिया था और कई फिल्मों के जरिए समाज को आगाह किया था. ये फिल्में दिखाती हैं कि कैसे वर्चुअल गेम्स असल जिंदगी को तबाह कर सकते हैं.
1. काउंटडाउन ऐप
2019 में आई फिल्म काउंटडाउन एक खौफनाक ऐप की कहानी दिखाती है जो यूजर को उसकी मौत का समय बताता है. जैसे जैसे समय खत्म होता है, मौत करीब आती जाती है. यह फिल्म मोबाइल ऐप्स और डिजिटल डर की उस दुनिया को दिखाती है जहां गेम और रियल लाइफ की सीमा खत्म हो जाती है.
2. नर्व और डेयर गेम की सनक
नर्व एक ऑनलाइन डेयर गेम पर आधारित है, जहां खिलाड़ी छोटे चैलेंज से शुरू होकर जानलेवा स्टंट करने लगते हैं. लाइक्स और फॉलोअर्स के दबाव में खिलाड़ी अपनी जान तक जोखिम में डाल देते हैं. यह फिल्म पीयर प्रेशर और गेमिंग एडिक्शन की सच्चाई सामने लाती है.
3. स्टे अलाइव और वर्चुअल मौत
स्टे अलाइव में दिखाया गया है कि एक वीडियो गेम में मरने पर खिलाड़ी की असल जिंदगी में भी मौत हो जाती है. यह फिल्म बताती है कि कैसे गेमिंग की लत इंसान को हकीकत से काट देती है और नतीजा जानलेवा हो सकता है.
4. ब्रेनस्कैन और वीआर का डर
1994 की फिल्म ब्रेनस्कैन वर्चुअल रियलिटी जैसे गेम की कहानी है, जहां गेम खेलने वाला खिलाड़ी असल जिंदगी में अपराध करने लगता है. यह फिल्म पुरानी जरूर है, लेकिन गेमिंग एडिक्शन के खतरों को बेहद गहराई से दिखाती है.
5. चूज और डाई और पुराना गेम नया खतरा
2022 में आई चूज और डाई एक पुराने हॉरर गेम के इर्द गिर्द घूमती है. गेम खेलने पर खिलाड़ी की असल जिंदगी में डरावनी घटनाएं होने लगती हैं. यह फिल्म दिखाती है कि गेम्स सिर्फ स्क्रीन तक सीमित नहीं रहते, बल्कि जिंदगी को भी प्रभावित करते हैं. ये सभी फिल्में सिर्फ डराने के लिए नहीं बनीं. इनका मकसद समाज को यह समझाना है कि गेमिंग की दुनिया जितनी मजेदार है, उतनी ही खतरनाक भी हो सकती है. टास्क रिवार्ड और पनिशमेंट का सिस्टम बच्चों और युवाओं के दिमाग को कंट्रोल कर सकता है.